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Business News: बड़े प्राइवेट बैंकों से FII की दूरी, छोटे और मिड-साइज बैंकों में बढ़ा विदेशी निवेश

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Alam Ki Khabar: Business News, Banking News | FY27 की पहली तिमाही में विदेशी निवेशकों ने बड़े निजी बैंकों में हिस्सेदारी घटाई, जबकि कई छोटे और मिड-साइज बैंकों में निवेश बढ़ाया। जानिए क्या है इसकी वजह और किन बैंकों को मिला फायदा।

मुंबई, 4 अगस्त। आलम की खबर: भारतीय बैंकिंग सेक्टर में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निवेश रणनीति बदलती नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के शेयरहोल्डिंग आंकड़ों से संकेत मिला है कि विदेशी निवेशक बैंकिंग सेक्टर से दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि बड़े निजी बैंकों से कुछ निवेश निकालकर छोटे और मिड-साइज निजी बैंकों में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। बाजार विशेषज्ञ इसे बैंकिंग सेक्टर के भीतर बदलती निवेश रणनीति का संकेत मान रहे हैं।

जून तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक और RBL बैंक सहित 17 बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम की। इनमें सबसे अधिक कमी HDFC बैंक में दर्ज की गई, जहां FII की हिस्सेदारी 2.18 प्रतिशत घटकर 41.82 प्रतिशत रह गई। एक्सिस बैंक में यह हिस्सेदारी 2.09 प्रतिशत घटकर 42.05 प्रतिशत और ICICI बैंक में 0.69 प्रतिशत घटकर 33.79 प्रतिशत रह गई।

दूसरी ओर विदेशी निवेशकों ने फेडरल बैंक, कर्नाटक बैंक, साउथ इंडियन बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक, DCB बैंक, तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक, उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक, ESAF स्मॉल फाइनेंस बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इनमें फेडरल बैंक में सबसे अधिक 1.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मिड-साइज बैंकों ने हाल के वर्षों में अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत की है। इन बैंकों ने बेहतर डिपॉजिट ग्रोथ, मजबूत लोन पोर्टफोलियो और नियंत्रित एनपीए के दम पर निवेशकों का भरोसा जीता है। यही कारण है कि विदेशी निवेशकों की रुचि इन बैंकों की ओर बढ़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। बैंकों की बैलेंस शीट पहले से बेहतर है, एसेट क्वालिटी मजबूत है और देश में बैंकिंग सेवाओं के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में बैंकिंग कारोबार में अच्छी वृद्धि की उम्मीद की जा रही है।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि बड़े निजी बैंक कमजोर नहीं हुए हैं। HDFC बैंक, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक जैसे संस्थान अब भी मजबूत पूंजी, बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर मुनाफे के मामले में अग्रणी हैं। लेकिन छोटे और मिड-साइज बैंक अपेक्षाकृत तेज ग्रोथ की संभावना दिखा रहे हैं, जिससे विदेशी निवेशकों का रुझान उनकी ओर बढ़ा है।

बाजार जानकारों के अनुसार पहली तिमाही में छोटे बैंकों ने लोन और डिपॉजिट दोनों में बेहतर वृद्धि दर्ज की है। अधिकांश बैंकों ने अपने मार्जिन को बनाए रखा है और उनकी कर्ज लागत भी नियंत्रण में रही है। यही वजह है कि भविष्य में इनकी कमाई और रिटर्न बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है।

विशेष टिप्पणी:

विदेशी निवेशकों की यह रणनीति बताती है कि अब उनका फोकस केवल बड़े नामों पर नहीं बल्कि बेहतर ग्रोथ क्षमता वाले बैंकों पर भी है। यदि छोटे और मिड-साइज बैंक अपनी वित्तीय मजबूती और एसेट क्वालिटी बनाए रखते हैं तो आने वाले समय में उनमें निवेश का रुझान और बढ़ सकता है।

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